शनिवार, 14 नवंबर 2009

SANJEEVNI

संजीवनी........यानि जो जीवन वापस ला सके........संजीवनी .......जो जीवन से हारे हुए में भी प्राण फूँक दे .....!
वो संजीवनी आज खो चुकी। कोई नही जानता कहाँ है संजीवनी ? सब के जीवन में संजीवनी की कमी अखरती है। जब कोई अपने जीवन से किसी न किसी मोड़ पर हार जाता है.....जब कोई पल उसे बे- मौत मार जाता है , तब याद आती संजीवनी... बारिश की एक बूंद ......किसी बच्चे की हँसी....माँ का आँचल.....कोई विश्वास भरा स्पर्श तब संजीवनी का काम करता है । पर कभी- कभी फिर भी संजीवनी की कमी खलती है ......अगर आपको भी कभी संजीवनी की कमी खली है , तो ये ब्लॉग आपके लिए है ....यहाँ आप अपने मन के कोने में बैठी किसी कमी को खाली कर सकते हैं.......
वर्तिका