मन बहुत व्याकुल हो रहा है. आज अचानक से याद आ रहा है कि जब वर्ष २००० आया था तो सदी बदली थी. बहुत हल्ला था तब. लेकिन तब मै ११-१२ साल की एक बच्ची , राजस्थान के जयपुर जिले के पावटा में एक दुकान पर खड़ी होकर ग्रीटिंग खरीद रही थी साल २००० के . और दुकान की टेबल तक बस मेरा सर ही पहुँच रहा था. उस साल की बस एक यही याद ज़हन में है. तब मुझे बहुत अधिक मतलब नहीं था था की सदी बदल रही है . बस आश्चर्य होता था की लोग सदी के बदलने पर इतने क्यूँ असहज हैं. तो फिर दशक का बदलना मेरे लिए कोई मायने नहीं रखता था. मै वैसे ही रहने वाली थी. मम्मी पापा वैसे ही रहने वाले थे. नाना नानी वैसे ही रहने वाले थे. मेरी दादी वैसे हे रहने वालीं थी . मेरे भाई बहन वैसे ही रहने वाले थे. मेरे दोस्त वैसे हे रहने वाले थे. मेरा परिवेश मेरा वातावरण वैसा हे रहेने जा रहा था . शायद इसलिए . या फिर शायद इन सब बातों का मेरे मन में कोई विचार तक ना आया हो. आज मै दिल्ली में हूँ . बड़ी ( समझदार) हो चुकी हूँ. और इन सब की मुझे चिंता है. अगले दशक में ऐसे परिवर्तन होने हैं जो मुझे जीवन भर प्रभावित करेंगे. जानती हूँ मै और शायद यही मेरे मन की चिंता है.
मेरा बस चलता तो कुछ भी करके भविष्य में झांक लेती और अपनी जिज्ञासा मिटा लेती . लेकिन मै न तो कोई त्रिकाल दर्शी हूँ और ना ही मैंने अभी तक कोई टाइम मशीन इजाद की है. ये मात्र साल नहीं बदल रहा. समय इस दशक में कई बड़े परिवर्तन मेरी जिंदगी में करने वाला है. हर किसी की जिंदगी में होते है. लेकिन इतना उत्सुक मैंने अपने भविष्य के बारे में खुद को कभी नहीं पाया जितना की मै आज इस वख्त अपने आप को पा रही हूँ.
मै आज जीवन के एक ऐसे मोड़ पर खड़ी हूँ कि कुछ नहीं कह सकती कि ये रास्ते मुझे कहाँ ले जायेंगे? मेरा क्या होगा? आगे क्या होगा? हे भगवान् जो भी हो अच्छा ही हो . मै उम्र के दूसरे पड़ाव पर हूँ . बीते हुए दशक से बस बचपन की मीठी और अल्ल्हड़ यादें रह गई हैं. इस दशक में मेरे जीवन को ठहराव मिलेगा . मेरा करियर सेट होगा. मेरी शादी होगी. मै किसी की संगिनी भी बनूगी और जीवन दायनी भी बनूगी . मुझे बहुत डर लग रहा है. सब ठीक होगा ना? हाँ अब बहुत अच्छा होगा. भगवान् जी मुझे शक्ति दीजिएगा की मै अपने कर्त्तव्य ठीक से निभा सकूँ और आशीर्वाद दीजिएगा की मुझे मेरे हक ठीक से मिल जाएँ .
नहीं जानती की जब २०२१ आने पर दुबारा आज के लिखे अपने इस लेख को देखूंगी तो ना जाने क्या सोच रही होंगी. घर पे होंगी या ऑफिस में. बच्चा मुझे परेशान कर रहा होगा या बच्चे. हाहाहा . या फिर बच्चों के पापा ...या उनकी दादी आवाज़ लगा रही होगी . या फिर नेक्स्ट बुलेटिन जाने को तैयार होगा और मै कहीं और खोई होंगी. आज नाखूनों पर ग्रीन नेल पोलिश है रेड डोट्स के साथ ! . पता नहीं शायद तब तक हाथों और चेहरे पर झुर्रियां आने लगें. मम्मी रिटायर हो जायेंगी . और तब तक तो पापा भी रिटायर हो जायेंगे. हमारे घर का पता नहीं क्या स्वरूप होगा . मै आशा करती हूँ की नाना नानी हमें छोड़ कर कहीं नहीं जायेंगे. दादी तो अभी तक जवान ही लगती हैं हमारी. :-) भगवान् जी आपकी बेटी का बहुत नाज़ुक सा दिल है. इसका ख़याल रखियेगा. बस इतनी सी आपसे प्रार्थना है. पता है मुझे बिलकुल वैसा लग रहा है जब मै पहली बार बोर्ड के पेपर देने जा रही थी. तब तो दो चार पेपर थे और मै कितना डर रही थी. अब तो आगे ऐसे कई बोर्ड एक्स्जाम्स हैं. और मै अच्छी परसेंटेज लाना चाहती हूँ. मै अपनी तरफ से १०० प्रतिशत दूंगी ,और आप भगवान् जी मुझे इस लायक बनाये रखना की मै १०० प्रतिशत प्रयास कर सकूँ . और मेरे प्रयासों को सफल बनाने की जिम्मेदारी आपकी है.
आपकी बेटी
वर्तिका
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